Manzil Shayari

Manzil Shayari / Best 40+ Manzil Status ( मंजिल शायरी )

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Manzil Shayari


1. अलग अलग थे रास्ते लेकिन मंज़िल एक है, सुकून है दिल को के हम मिलेंगे ज़रूर.

Alag Alag Se Raste Lekin Manzil Ek Hai, Sukun Hai Dil Ko Ke Ham Milenge Jarur.


Manzil Shayari In Hindi

2. मंज़िले हमारे करीब से गुज़रती गयी जनाब, और हम औरो को रास्ता दिखाने में ही रह गये.

Manzile Hamare Karib Se Gujarti Nahi Janaab, Aur Ham Auro Ko Rasta Dikhane Me Hi Rah Gaye.


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3. ये भी क्या मंज़र है बढ़ते हैं न रुकते हैं, क़दम तक रहा हूँ दूर से मंज़िल को मैं मंज़िल मुझे.

Ye Bhi kya Manzar Hai Badhate Hai Rukte Hai, Kadam Tak Raha Hu Dur Se Manzil Ko Mai Manzil Mujhe.


Manzil Shayari In Hindi


Manzil Shayari 2 Line

4. मंज़िल तो मिल ही जायेगी भटक कर ही सही, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकला ही नहीं करते.

Manzil To Mil Hi Jayegi Bhatak Kar Hi Sahi, Gumrah To Vo Hai Jo Ghar Se Nikla Hi Nahi Karte.


5. रास्तों पर निगाह रखने वाले, भला मंज़िल कहाँ देख पाते हैं.

Rasto Par Nigaah Rakhane Vale, Bhala Manzil Kaha Dekh Payenge.


6. सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़, रुकता तो सफर जाता ,चलता तो बिछड़ जाता.

Samane Manzil Thi Aur Piche Us Ki Avaaj, Rukta To Safar Jata, Chalta To Bichad Jata.


7. बढ़ते चले गए जो वो मंज़िल को पा गए, मैं पत्थरों से पाँव बचाने में रह गया.

Badhate Chale Gaye Jo Vo Manzil Ko Pa Gaye, Mai Pattharo Se Paav Bachane Me Rah Gaya.


8. मिलना किस काम का अगर दिल ना मिले, चलना बेकार हे जो चलके मंज़िल ना मिले.

Milna Kis Kaam Ka Agar Dil Na Mile, Chalna Bekar Hai Jo Chalke Na Mile.


Manzil Status In Hindi

9. मंजिल तो मिल गई अब सफ़र कैसा, जब ख़ुदा तेरे साथ है फिर डर कैसा.

Manzil To Mil Gayi Ab Safar Kaisa, Jab Khuda Tere Sath Hai Fir Dar Kaisa.


Manzil Shayari 2 Line


10. कब मिल जाए किसी को मंजिल ये मालूम नहीं, इंसान के चेहरे पर उसका नसीब लिखा नहीं होता.

Kab Mil Jaye Kisi Ko Manzil Ye Maalum Nahi, Insan Ke Chehare Par Uska Naseeb Likha Nahi Hota.


11. ना जाने क्यों इंसान को इंसान होने पर गुमान है, जबकि सफर ताउम्र है और मंजिल दो गज मकान है.

Na Jane Kyo Insaan Ko Insaan Hone Par Gumaan Hai, Jabki Safar TaaumraHai Aur Manzil Do Gaj Makaan Hai.


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12. मंजिल चाहे कितनी भी उंची क्यो ना हो दोस्तो, रास्ते हमेशा पैरो के नीचे होते है.

Manzil Chahe Ktani Bhi Uchi Kyo Na Ho Dosto, Rate Hamesha Pairo Ke Niche Hote Hai.


13. चलता रहूँगा मै पथ पर, चलने में माहिर बन जाउंगा, या तो मंज़िल मिल जायेगी, या मुसाफिर बन जाउंगा.

Chalta Rahunga Mai Path Par, Chalne Me Maahir Ban Jaunga, Ya To Manzil Mil Jayegi, Ya Musafir Ban Jaunga.


Manzil Status 2 Line

14. जिस दिन से चला हूं मेरी मंज़िल पे नज़र है, आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा. बशीर बद्र

Jis Din Se Chala Hu Meri Manzil Pe Najar, Aankho Ne Kabhi Mil Ka Patthar Nahi Dekha.


15. मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है, मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं.

Manzil Mere Kadamo Se Abhi Dur Bahut Hai, Magar Tasalli Ye Hai Ki Kadam Mere Sath Hai.


16. मंजिल मिले या ना मिले, ये तो मुकद्दर की बात है, हम कोशिश भी ना करे ये तो गलत बात हैं.

Manzil Mile Ya Na Mile, Ye Muqaddar Ki Baat Hai Ham Koshish Bhi Na Kare To Galat Baat Hai.


Manzil Status In Hindi


17. किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल, कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा-अहमद फ़राज़

Kisi Ko Ghar Se Nikalte Hi Mil Gayi Manzil, Koi Hamari Tarah Umra Bhar Safar Me Raha.


18. मंजिलों से गुमराह भी कर देते हैं कुछ लोग, हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता.

Manzil Se Gumrah Bhi Kar Dete Hai Kuch Log, Har Kisi Se Rasta Puchna Achha Nahi Hota.


Manzil Shayari In Urdu

19. मंज़िल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है, मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ है.

Manzil Mere Kadamo Se Abhi Bahut Dur Hai, Magar Tasalli Ye Hai Ki Kadam Mere Sath Hai.


20. ना कोई मंज़िल ना कोई ठिकाना, हम तो मुसाफिर है पता नहीं कब कहा हो जाना.

Na Koi Manzil Hai Na Koi Thikana, Ham To Musafir Hai Parta Nahi Kab Kaha Ho Jana.


21. मंज़िलें पाँव पकड़ती हैं ठहरने के लिए, शौक़ कहता है दो चार क़दम और सही.

Manzile Paav Pakadti Hai Thaharne Ke Liye, Shauk Kahta Hai Do Char Kadam Aur Sahi.


22. कुछ मंजिले है जो दिखती ही नहीं, मगर ये ना समझों की वो मिलती ही नहीं.

Kuch Manzil Hai Jo Dikhati Hi Nahi, Magar Ye Na Samjho Ki Vo Milati Nahi.


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23. ना किसी से ईर्ष्या ना किसी से कोई होड़, मेरी अपनी मंजीले मेरी अपनी दौड़.

Na Kisi Se Irshya Na Kisi Se Koi Hod, Meri Apani Manzile Meri Apani Daud.


Manzil Status 2 Line


Shayari On Raaste Manzil

24. एक न एक दिन हासिल कर ही लूँगा, ‘ठोकरें’ जहर तो नहीं जो खाकर मर जाऊँगा.

Ek Na Ek Din Haasil Kar Hi Lunga, Thokare ZaharTo Nahi Jo Khaakar Mar Jaunga.


25. कितना मुश्किल है बड़े होकर बड़े रहना भी, अपनी मंजिल पर पहुँचना भी खड़े रहना भी.

Kitna Mushkil Hai Bade Hokar Bade Rahna Bhi, Apani ManzilPar Pahuchna Bhi Khade Rahna Bhi.


26. पहुँचे जिस वक़्त मंज़िल पे तब ये जाना, ज़िन्दगी रास्तों में बसर हो गई.

Pahuche Jis Wakt Pe Tab Se Jana, Zindagi Rasto Me Basar Ho Gayi.


27. मंज़िल का पता है न किसी राह गुज़र का, बस एक थकन है कि जो हासिल है सफ़र का.

ManzilKa Pata Hai Na Kisi Raah Guhjar Ka, Bas Ek Thakaan Hai Ki Jo Hasil Hai Safar Ka.


Shayari On Raaste Manzil


28. मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती हैं.

Manzil Unhi Ko Milti Hai Jinake Sapano Me Jaan Hoti Hai, Pankh Se Kuch Nahi Hota, Hausalo Se Udaan Hoti Hai.


2 Line Shayari On Rasta

29. मंज़िलें पाँव पकड़ती हैं ठहरने के लिए, शौक़ कहता है दो चार क़दम और सही.

Manzile Paav Pahkadti Hai Thaharne Ke Liye, Shauk Kahta Hai Do Char Kadam Aur Sahi.


30. सीढ़ी की आसानी तुम्हे मुबारक हो, मैंने अपनी दम पर मंज़िल पाई है.

Seedhi Ki Aasani Tumhe Mubaarak Ho, Maine Apani Dam Par Manzil Payi Hai.


31. ज़िन्दगी ठहरती नहीं किसी मुश्किलात से, ज़रा मंज़िल को बताओ आ रहा हूं मैं शान से.

Zindagi Thaharti Nahi Kisi Mushkilaal Se, Jara Manzil Ko Bataao Aa Raha Hu Mai Shaan Se.


Na Koi Manzil Na Thikana Shayari


32. सोचने से कहाँ मिलते है तमन्नाओं के शहर, चलना भी जरूरी है मंजिल को पाने के लिए.

Sochane Se Kaha Milte Hai Tamannao Ke Shahar, Chalna Bhi Jaruri Hai Manzil Pane Ke Liye.


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33. खत्म हो भी तो कैसे, ये मंजिलो की आरजू, ये रास्ते है के रुकते नहीं, और इक हम के झुकते नही.

Khatm Ho Bhi To Kaise, Ye Manzilo Ki Aarzoo, Ye Raste Hai Ke Jhukte Nahi, Aur Ek Ham Ke Jhukte Nahi.


34. दिल बिन बताए मुझे ले चल कही, जहां तू मुस्कुराएं मेरी मंज़िल वही.

Dil Bina Bataaye Mujhe Le Chal Kahi, Jaha Tu Muskuraye Meri Manzil Vahi.


Shayari On Manzil

35. चलो दोस्तों चलकर मंजिले ढूँढ लाए, कुछ सपनें तो अक्सर पुरे नहीं होते.

Chalo Dosto Chalkar Manzile Dhundh Laye, Kuch Sapane To Aksar Pure Nahi Hote.


36. गम में डूबी मेरी हर आहें है, मंजिल का पता नहीं और काँटों भरी राहें है.

Gam Me Doobi Meri Har Aahe Hai, Manzil Ka Pata Nahi Aur Kaato Bhari Raahe Hai.


Manzil Shayari In Hindi


37. मंज़िल पा ली मैंने ठोकरें खा कर, लेकिन मरहम ना पा सका मंजिल पाकर.

Manzil Paa L Maine Thokare Khaa Kar, Lein Marham Na Paa Saka Manzil Paakar.


38. मोहब्बत में सहर ऐ दिल बराए नाम आती है, ये वो मंज़िल है जिस मंज़िल में अक्सर शाम आती है.

Mohabbat Se Saha Ae Dil Bataaye Naam Aati Hai, Ye Vo Manzil Hai Jis Manzil Me Aksar Shaam Aati Hai.


39. मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया -मजरूह सुल्तानपुरी

Mai Akela Hi Chala Tha Jaanib-Ae-Manzil Magar, Log Sath Aate Gaye Aur Kaarva Banta Gaya.


40. थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफिर, तुझे मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आएगा.

Thak Kar Mat Baith, Ae Manzil Ke Musafir, Tujhe Manzil Bhi Milegi Aur Milane Ka Maja Bhi Aayega.


41. एक रास्ता यह भी है मंजिलों को पाने का, कि सीख लो तुम भी हुनर हाँ में हाँ मिलाने का.

Ek Rasta Yah Bhi Hai Manzilo Ko Pane Ka, Ki Sikh Lo Tum Bhi Hunar Haa Me Haa Milaane Ka.


Manzil Shayari In Urdu


42. थका हु फिर भी बढ़ रहा हूँ मंजिल की और यही सोचकर, के जित गया तो हंगामा बहुत बड़ा होगा.

Thaka Hu Fir Bhi Badh Raha Hu Manzil Ki Or Yahi Sochkar, Ke Jit Gaya To Hangama Bahut Bada Hoga.


43. मंज़िल तो मिल ही जायेगी भटक कर ही सही, गुमराह तो वो हैं जो घर से निकला ही नहीं करते.

Manzil To Mil Hi Jayegi Bhatak Kar Hi Sahi, Gumraah To Vo Hai Jo Ghar Se Nikla Hi Nahi Karte.


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44. बहुत गुरूर था, छत को छत होने पर, एक मंजिल और बनी और वो छत फर्श हो गई.

Bahut Gurur Tha Chat Ko Chat Hone Par, EK Manzil Aur Bani Aur Vo Chat Farsh Ho Gayi.


Final Word :- 

आशा करता हु कि आपको हमारा Manzil Shayari का पोस्ट जरुर पसंद आया होगा, इसी तरह के और शायरियों को पढ़ने के लिए आप हमारे और भी पोस्ट को जरुर पढ़े.

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