Guru Nanak Quotes – Best 125+ inspirational {Guru Nanak Dev Ji Quotes}

Guru Nanak Dev  Quotes

Guru Nanak Dev Ji Quotes में पढ़ेंगे Best 101+ inspirational & Powerful Guru Nanak Quotes in Hindi को जिसमे गुरुनानक जी द्वारा दिए गए उपदेशो को जिसे पढ़कर आप अपने जीवन में लाभ उठा सकते। 

सत श्री अकाल :- दोस्तों आज की पोस्ट  गुरू नानक देव जी को समर्पित हैं. आज की यह पोस्ट Religion Quote से ली गयी हैं. इसमें सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देवजी  द्वारा दिए गए उपदेशों का संग्रह किया गया हैं. 

दोस्तों आज का यह पोस्ट की शुरुआत करने से पहले आप को बताते चले की आज की पोस्ट की Topic हैं Guru Nanak Dev Quotes जिसे आप की सुविधा के लिए अलग-अलग कई  Categories में Divide किया गया हैं. 

  1. गुरु नानक देव के जीवनी से जुडी खास बाते।  
  2. सिख धर्म की स्थापना
  3. सिख धर्म का मूल मन्त्र
  4. गुरु के लंगर की शुरुआत
  5. प्रकाश उत्सव पर्व 
  6. गुरु नानक जी  के अन्य नाम
  7. गुरु नानक जी का निधन
  8. गुरु नानक जी द्वारा दिए गए 10 उपदेश।  
  9. गुरु नानक देव जी के सुविचार
  10. सिख धर्म के दस गुरुओं के नाम
  11. गुरु नानक देव जी द्वारा दिए गए उपदेश पंजाबी में 
  12. गुरु नानक देव जी द्वारा दिए गए उपदेश अंग्रेजी  में

जाने गुरू नानक देव जी से जुडी खास बाते:

जन्म:-

गुरू नानक जी का जन्म रावी नदी के किनारे बेस गांव तलवंडी में कार्तिकी पूर्णिमा के दिन 15 अप्रैल 1469 को हुआ था.  तलवंडी जोकि पाकिस्तान के लाहौर शहर से 30 मील पश्चिम दिशा में स्थित है, इनका जन्म किसान परिवार में हुआ और नानक जी के  पिता जी का नाम कालू मेहता था और माता जी का नाम तृप्ता देवी था. 

बचपन से इनके मस्तक पर तेज़ था और इनके अंदर प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे थे. और बाल्यकाल ही से ये सांसारिक विषयों से उदासीन रहा करते थे। 

बाल्यकाल में  जब बच्चो का ध्यान खेल कूद में होता था. लेकिन जब इनके साथी खेल कूद में व्यस्त होते थे तब नानक जी अपनी आँखों को बंद कर के मन ही मन में ध्यान चिंतन व मनन में लीन हो जाते थे.

शिक्षा व ज्ञान की प्राप्ति :- 

इनके पिता जी ने बालक नानक को शिक्षा दिलाने हेतु पंडित हरदयाल जी के पास ले गए लेकिन पंडित हरदयाल जी उन्हें जब शिक्षा दे रहे थे उस दौरान नाना जी के प्रश्नो को सुनकर निरुत्तर हो जाते थे.  और उनके अथाह ज्ञान के भण्डार को देख कर चकित और अचभित हो जाते थे और वो समझ गए थे की यह बालक कोई साधारण बालक नहीं हैं स्वयं ईश्वर ने पढ़ाकर इस संसार में भेजा है।

पंडित हरदयाल जी ने अपनी हार मान ली तथा वे इन्हें ससम्मान घर छोड़ने आ गए।  इसके बाद नानक जी के पिता जी ने इनकी शिक्षा के लिए मौलवी कुतुबुद्दीन जी के पास ले गए लेकिन उनका भी वही हाल हुआ जब बालक नानक देव जी के प्रश्नो को सुना और वो भी हैरान हो गए इस चमत्कारी बालक के सवालो को सुन कर जिसका उत्तर उनके पास भी नहीं था.

शिक्षा के दौरान Nanak Dev जी घर-बार त्याग कर के सत्य ज्ञान की प्राप्ति के लिए भ्रमण पर निकल गए.  दूर दूर के देशों में घुमे और साधना उपासना की और अपने अंदर सामान्य स्वरूप को स्थिर किया और उसके बाद वो वापस अपने निवास घर वापस लौट आये. और उसके बाद उन्होंने पंजाब में कबीरदास की ‘निर्गुण उपासना’ का प्रचार प्रसार किया। 

गुरु नानक जी का परिवार:-

इनका विवाह सोलह वर्ष की कम आयु में  ही करा दिया गया था. गुरदासपुर जिले के अंतर्गत लाखौकी नामक स्थान के रहने वाले मूला की कन्या सुलक्खनी से. और  उन्हें दो पुत्रों की प्राप्ति हुयी। बड़े पुत्र का नाम श्रीचंद था और दूसरे पुत्र का नाम लखमीदास था. 

व्यापार:-

गुरुनानक जी के पिता जी  किसान होने के नाते उन्हें भी कृषि का व्यापार करना चाहते थे लेकिन लाख प्रयास के बाद भी सफल ना हो सके. जब वो थक गए तो उन्होंने घोड़ों का व्यापार करने हेतू Nanak Dev जी को कुछ राशि दी ताकि उन पैसो से वो व्यापार कर सके. लेकिन नानक जी का ह्रदय सेवा भाव और ज्ञान दर्शन में लगा रहता था. और इसी कारण पिता जी से मिली राशि को साधु-संतों की सेवा में लगा दी.

इसी तरह फिर वो सुल्तानपुर अपने बहनोई के पास चले गए और वही सुल्तानपुर के गवर्नर दौलत खां के यहां मादी के कार्य के लिए नियुक्त कर लिए गए और उन्होंने बड़े ही सच्चे मन और ईमानदारी के साथ कार्य को किया और उस कार्य से प्राप्त हुयी आय हुयी का ज्यादातर हिस्सा गरीब लाचार लोगो सहित साधु-संतो में बाँट दिया करते थे.

सिख धर्म की स्थापना:-

नानक जी ने ही सिख धर्म की स्थापना की और इसके प्रथम गुरु बने. सिख पंथ भी हर एक धर्म की तरह पवित्र और अनुपम हैं. यह धर्म मानव जाति के अंदर प्रेम, सेवा, परिश्रम, परोपकार और भाई-चारे की दृढ़ नीव डालने के उदेश्य से बनाया गया. और साथ ही भारतीय समाज में फैले कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, जर्जर रूढ़ियों और पाखण्डों को दूर कर लोगो को सन्देश दिया की ईश्वर एक है, उसी ने सबको बनाया है।

सिख धर्म का मूल मन्त्र:- 

“इक ओंकार”

इस मंत्र के द्वारा नाना देव जी ने  भगवान् के होने का सन्देश दिया, और कहा “ईश्वर एक हैं” वो हर एक जगह मौजूद हैं हर प्राणी, पशु, पक्षी और हर एक स्थान पर हैं. वही हमारा पिता हैं और हमारा पालनहार हैं. इस लिए हम सभी को एक दूसरे के साथ प्रेम भाव से रहना चाहिए।  ताकि परमात्मा के दरबार में जब हम पहुंचे तो उसे अपने द्वारा किये गए कर्मो लज्जित न होना पड़े।

सिख धर्म  स्थापना उन्होंने सनातन मत की मूर्तिपूजा की शैली के विपरीत एक परमात्मा की उपासना हेतु बनाया और शिखपंत के द्वारा मानव समाज को एक सरल, सत्य का मार्ग दिया।

गुरुनानक देव ने सिख धर्म के अंदर सभी धर्मों की अच्छाइयों को समाहित किया। जिसमे मानव कल्याण की बाते थी.  सिखमत  का प्रारम्भ ही “एक” से हुआ हैं. और यह “एक” जिसे निरंकार, पारब्रह्म आदिक गुणवाचक नामों से जाना जाता हैं. और यही हैं सिखमत का सबसे बड़ा मंत्र। 

  • एक ओंकार, सतिनामु, करतापुरखु, निर्भाओ, निरवैरु, अकालमूर्त, अजूनी, स्वैभंग गुर पर्सादि जपु, आदि सचु जुगादि सचु, है भी सचु नानक होसी भी सचु.

निरंकार का स्वरूप श्री गुरुग्रंथ साहिब में सबसे प्रारम्भ में ही दर्शाया गया हैं. जिसको आम भाषा में  मूल मन्त्र कहते हैं। जैसा की हम सभी जानते हैं तकरीबन सभी धर्म में “एक” ही ईश्वर को मान कर उसकी आराधना करते हैं. 

गुरुनानक  जी ने अपने एक उपदेश (सबद ) में बताया कि पण्डित पोथी (शास्त्र) पढ़ते हैं, किन्तु विचार को नहीं समझते। दूसरों को उपदेश (ज्ञान) देते हैं, और इससे वो अपना माया (पैसे कमाने का )  व्यापार चलाते है। उनकी कथनी झूठी है, वे संसार में भटकते रहते हैं। इन्हें सबद के सार का कोई ज्ञान नहीं है। ये पण्डित तो बस वाद-विवाद में ही पड़े रहते हैं।

गुरु के लंगर की शुरुआत :-

सिख धर्म का सबसे बड़ा यह भी उदेश्य था की जात-पात जैसी प्रथा को समाप्त करना, तथा सभी मानव जाती के लोगो को एक समान देखना और इसी सोचो को आगे बढ़ाते हुए “लंगर” की प्रथा की शुरुआत की गयी ताकि इस  लंगर में धर्म, लिंग, आयु, जाति, समप्रदाय या रंग के भेद-भाव को त्यागकर एक पंगत (पंक्ति)  में बैठकर भोजन कर सके.

और इस लंगर में सेवा और भक्ति  मिश्रण हो.  समाज के सभी छोटे बड़े लोगो में प्रेम बढ़े. इसी सोच के साथ Guru Nanak Dev ji  ने लंगर प्रथा की शुरुआत की. और आज भी यह प्रथा चली आ रही हैं. सिख धर्म को मानाने वाले अनुयायी गुरुद्वारों में लंगर का आयोजन करते हैं और सभी को प्रेम भक्ति भाव से एक पंगत (पंक्ति) में बिठा कर भोजन कराते हैं. 

प्रकाश उत्सव :-

प्रकाश उत्सव का पर्व गुरु नानक देव जी के जन्म से जुड़ा हुआ हैं और सिख समुदाय के लोग इसे पड़े ही हर्षो उल्लास से मानते हैं. हालांकि गुरु नानक के जन्म को लेकर सिख विद्वानों में दो मत रहे हैं एक का मानना हैं की नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 के दिन हुआ था वही दूसरे पक्ष के विद्वानों का कहना हैं की इनका जन्म देव दीपावली अर्थार्त कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था.

और इसी दिन  इनके जन्म की ख़ुशी में पूरा देव लोक पृथ्वी पर उतरा था. गुरुनानक  जी के प्रकाश उत्सव (जन्मदिवस) पर प्रति वर्ष भारत से सिख श्रद्धालुओं का जत्था ननकाना साहिब जाकर वहां अरदास करता हैं। दोस्तों अगर प्रकाश उत्सव के बारे में और अधिक जानकारी चाहते हैं तो webdunia की इस पोस्ट को भी पढ़े। .

गुरु नानक जी  के अन्य नाम :- सिख धर्म को मानाने वाले अनुयायी गुरुनानक जी को कई नामो से बुलाते हैं और उनका ध्यान करते हैं तो आईये जानते हैं उन नामो को?

  1. गुरु नानक,
  2. गुरु नानक देव जी,
  3. बाबा नानक,
  4. नानकशाह

नामों से संबोधित करते हैं. इनके अंदर सर्वगुणों का वास था. इनका व्यक्तित्व दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु  सहित इनमे अनेकों गुण थे.

गुरु नानक जी का निधन:-

गुरु नानक जी ने एक करतारपुर नामक एक नगर भी बसाया,  जो भारत और पाकिस्तान के बटवारे के दौरान पाकिस्तान में चला गया वह एक धर्मशाला भी बनवायीं थी. गुरुनानक जी अपने अंतिम दिनों में वही रहे और उन्होंने वही आश्वन कृष्ण 10, संवत् 1597 (22 सितंबर 1539 ईस्वी) अपने प्राणों को त्यागा और ज्योति में लीन हो गए. दोस्तों सिखधर्म और गुरुनानक जी के बारे में और विस्तार से जानना चाहते हैं तो wikipedia के इस पोस्ट को भी पढ़े.

गुरु नानक देव जी के  दस उपदेश:

Guru Nanak Dev Quotes में अब जानते हैं गुरनानक जी द्वारा दिए गए वो दस अनमोल उपदेशों को जो मानवकल्याण हेतु सिख धर्म को मानाने वाले अनुयायी को दिया। 

 

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1. ईश्वर एक है।
2. सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो।
3. ईश्वर सब जगह और प्राणी मात्र में मौजूद है।
4. ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता।
5.. ईमानदारी से और मेहनत कर के उदरपूर्ति करनी चाहिए।
6. बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं।
7.. सदैव प्रसन्न रहना चाहिए। ईश्वर से सदा अपने लिए क्षमा मांगनी चाहिए।
8. मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से ज़रूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए।
9. सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं।
10. भोजन शरीर को जि़ंदा रखने के लिए ज़रूरी है पर लोभ-लालच व संग्रहवृत्ति बुरी है।

यही वो दस उपदेश हैं जिनको अगर कोई मानव अपने जीवन में ग्रहण करता हैं तो उसका जीवन धन्य हो जाता हैं और जब वह परमात्मा से मिलता हैं तो उसका मस्तक अपने द्वारा किये गए कर्मो के कारण सदैव ऊँचा रहता हैं. और परमपिता उसके सभी कष्टों को दूर करता है.

दोस्तों अब Guru Nanak Dev Ji Quotes  में पढ़ते और जानते हैं कैसे हम अपने जीवन को सफल, उत्तम और सत्य, दया, ईमानदारी के मार्ग में आगे ले जाए ताकि हमारा भी ये मनुष्य रूप में लिया गया जन्म  सफल हो और परमपिता का स्नेह सदैव हमें मिलता रहे उनका हाथ हमारे सर पे हो.

तो देर कैसी आईये अब  शुरुआत करते हैं FB Status Quotes के इस पोस्ट की और बिना देर किये पढ़ते हैं गुरुनानक जी द्वारा दिए गए अनमोल सुविचारों को, जिसमे जीवन को उंचाईयों तक ले जाने के मार्ग बताये गए हैं. 

Guru Nanak Dev Ji Quotes – Best 101+ inspirational Guru Nanak Quotes

 

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11. ईश्वर की चमक से पूरा ब्रहांड प्रकाशमान हैं।


12. ईश्वर सब जगह और प्राणी मात्र में मौजूद है।


13. सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो।


14. भगवान एक है, लेकिन उसके कई रूप हैं।


15. जो शरीर में देवता का निवास कर देता है, वही गुरु है।


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16. सब धर्मो और जातियों के लोग एक है।
17. ईश्वर एक ही है और उसे पाने का तरीका भी एक ही है। वही सत्य है।
18. न कोई हिन्दू है न मुसलमान है – सभी मनुष्य हैं, सभी समान हैं।
19. कोई भी ईश्वर की सीमाओं और हदों को नहीं जान पाया है।
20. अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसलिए अहंकार कभी नहीं करना चाहिए।

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21.धार्मिक वही है जो सभी लोगों का समान रूप से सम्मान करे।


22. वह जिसे खुद में भरोसा नहीं है उसे कभी ईश्वर में भरोसा नहीं हो सकता।


23. दुनिया एक नाटक है, जो एक सपने में मंचित है।


24. केवल वो बोलो जो जो तुम्हारे लिए सम्मान लेकर आये।


25. जिन्होंने प्रेम किया है वे वो हैं जिन्होंने प्रेम को ढूंढ लिया है।


26. मेरा जन्म नहीं हुआ है; भला मेरा जन्म या मृत्यु कैसे हो सकती है।


27. आपकी दया मेरी सामाजिक स्थिति है।


28. वह जो सभी लोगों को बराबर मानता है धार्मिक है।


29. सत्य को जानना हर एक चीज से बड़ा है. उससे भी बड़ा है सच्चाई से जीना।


30. जहाँ भी प्रत्येक का संरक्षक मुझे रखता है, वहीँ स्वर्ग है।

 

31. सच पर चलने से ह्रदय स्वच्छ हो जाता है और आत्मा पर से झूठ का मैल धुल जाता है।


32. जिसका तन, मन, आत्मा और वाणी सभी झूठ से लिप्त हैं, वे कैसे शुद्ध या पवित्र होंगे।


33. ईश्वर स्मरण में गुरु की सहायता आवश्यक है. इसलिए गुरु का सम्मान और वंदन करें।


34. जिसके मस्तिष्क अन्धविश्वास से मुक्त हैं, उसको मृत्यु रंचमात्र भी भयभीत नहीं कर सकती।


35. संतों के सत्य वचनों को सुन, क्योंकि संत वही कहते हैं जो वे प्रत्यक्ष देख चुके हैं।


36. चिंता-मुक्त रहकर अपने कर्म करने चाहिए।


37. बंधुओं ! हम मौत को बुरा नहीं कहते, यदि हम जानते कि वास्तव में मरा कैसे जाता है।


38. सदैव परोपकार करो।


39. योगी को किस बात का डर होना चाहिए? पेड़, पौधे सभी उसीके अंदर और बाहर होते है।


40. कोई उसे तर्क द्वारा नहीं समझ सकता, भले वो युगों तक तर्क करता रहे।


41. ये पूरी दुनिया कठनाइयो में है. वह जिसे खुद पर भरोसा है वही विजेता कहलाता है।


42. तुम्हारी दया ही मेरा सामाजिक दर्जा (ओहदा) है।


43. वे लोग जिनके पास प्यार है, वे उन लोगो में से है जिन्होंने भगवान को ढूंढ लिया।


44. सिर्फ और सिर्फ वहि वाणी बोले जो शब्द आपको सम्मानित करते है।


45. शांति से अपने ही घर में खुद का विचार करे तब आपको मृत्यु का दूत छु भी नही पायेगा।


46. माया (धन) को जेब में ही स्थान देना चाहिए, अपने हृदय में नहीं।


47. ईश्वर सर्वत्र विद्यमान है ,हम सबका “पिता” वही है इसलिए सबके साथ प्रेम पूर्वक रहना चाहिए।


48. हमेसा दुसरे के मदद के लिए आगे रहो।


49. भगवान एक है, लेकिन उसके कई रूप हैं. वो सभी का निर्माणकर्ता है और वो खुद मनुष्य का रूप लेता है।


49. दुनिया में किसी भी व्यक्ति को भ्रम में नहीं रहना चाहिए।


50. बिना गुरु के कोई भी दुसरे किनारे तक नहीं जा सकता है।


51. प्रभु के लिए खुशियों के गीत गाओ, प्रभु के नाम की सेवा करो, और उसके सेवकों के सेवक बन जाओ।


52. बंधुओं ! हम मौत को बुरा नहीं कहते, यदि हम जानते कि वास्तव में मरा कैसे जाता है।


53. भगवान केवल एक ही है। उसका नाम सत्य है।


54. केवल वो बोलो जो जो तुम्हारे लिए सम्मान लेकर आये।


55. इस दुनिया में जब तुम खुशियाँ मांगते हो दर्द सामने आ जाता है।


56.ईश्वर की प्राप्ति गुरु द्वार संभव है, इसलिए गुरु का सम्मान और वंदन करो।


57.मैं लगातार उसके चरणों को नमन करता हूँ, और उनसे प्रार्थना करता हूं, गुरु, सच्चे गुरु, ने मुझे रास्ता दिखाया है।


58.संसार को जीतने के लिए अपनी कमियों और विकारों पर विजय पाना जरूरी है।


59.वह जिसे खुद में भरोसा नहीं है उसे कभी ईश्वर में भरोसा नहीं हो सकता।


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60. जिन्होंने प्रेम किया है वे वही हैं जिन्होंने परमात्मा को पाया है।
61.   व्यक्ति अपना जीवन सोने और खाने में गवां देता है और उसका महत्वपूर्ण जीवन बर्बाद हो जाता है।
62. भगवान के दरबार में सभी कर्मों का लेखा-जोखा होता है।
63. जब आप किसी की मदत करते हैं तो भगवान आपकी मदत करता है। हमेशा दूसरों की मदत के लिए आगे रहो।
64. इस दुनिया में जब जब तुम खुशियाँ मांगते हो दर्द सामने आ जाता है। खुशियाँ बाटने से ही खुशियाँ मिलती हैं।

65. तेरी हजारों आँखें हैं और फिर भी एक आंख भी नहीं ; तेरे हज़ारों रूप हैं फिर भी एक रूप भी नहीं।


65. स्त्री-जाति का आदर करना चाहिए। गुरु नानक देव, स्त्री और पुरुष सभी को बराबर मानते थे।


66. कभी भी किसी का हक नहीं छीनना चाहिए। जो लोग ऐसा करते है, उनको कभी सम्मान नहीं मिलता है।


67. अपने अस्तित्व के निवास में शांति से रहो, मृत्यु दूत तुम्हे छू भी नहीं पायेंगे।


श्री गुरु नानक देव जी के  सुविचार
68. अपने जीवन में कभी ये न सोचे की यह नामुमकिन है।


69. ओछी बुद्धि से, चित्त ओछा हो जाता है, और व्यक्ति मिठाई के साथ मक्खी भी खाता है।


 गुरु नानक देव जी के  सुविचार
70. मेहनत और ईमानदारी से काम करके उसमे से जरूरतमंद को भी कुछ देना चाहियें।


71. ये पूरी दुनिया कठनाइयो में है. वह जिसे खुद पर भरोसा है वही विजेता कहलाता है।


72. जो भी बीज बोया जाता है, उस तरह का एक पौधा भी सामने आता है।


73. परमात्मा एक है और उसके लिए सब एक समान है।


74. वहमो और भ्रमो को छोड़ दो।


75. सब धर्मो और जातियों के लोग एक है।


76. कोई उसे तर्क द्वारा नहीं समझ सकता भले ही कोई युगों-युगों तक तर्क करता रहे।


77. कोई भी ईश्वर की सीमाओं और हदों को नहीं जान पाया है।


78. सच्चा जीवन निर्वाह करो।


79. धार्मिक वही है जो सभी लोगों का समान रूप से सम्मान करे।


80. सदैव परोपकार करो।


81. सत्य को जानना हर एक चीज से बड़ा है. उससे भी बड़ा है सच्चाई से जीना।


82. जिन्होंने प्रेम किया है वे वो हैं जिन्होंने प्रेम को ढूंढ लिया है।


गुरु नानक देव जी के अनमोल सुविचार 
83. धन को केवल जेब तक ही रखें, उसे अपने हृदय में स्थान ना दें।


84. हमेशा तनाव मुक्त रहकर अपना कार्य करना चाहिए।


85. यदि तू मस्तिष्क को शांत रख सकता है तो तू विश्व पर विजयी होगा।


86. ना मैं एक बच्चा हूँ, ना एक नवयुवक, ना मैं पौराणिक हूँ और न ही किसी जाती का।

 

दोस्तों आईये  Guru Nanak Dev Quotes की इस  Post जानते सिख धर्म के दस गुरुओं के नामों को जिन्होंने हमें ज्ञान के दर्शन कराये और हमें सत्य का मार्ग दिखाया।

  1. गुरु नानक देव
  2. गुरु अंगद देव
  3. गुरु अमर दास
  4. गुरु राम दास
  5. गुरु अर्जुन देव
  6. गुरु हरगोबिन्द
  7. गुरु हर राय
  8. गुरु हर किशन
  9. गुरु तेग बहादुर
  10. गुरु गोबिंद सिंह

दोस्तों जैसा आप ने ऊपर जाना सिख धर्म के दस गुरुओं के नाम को. अब Guru Nanak Dev ji Quotes में आगे पढ़ते हैं और ज्ञान,धर्म, आध्यत्म, आपसी प्रेमभाव तथा परमपिता के स्नेह को प्राप्त करने के सत्य मार्ग को जो गुरु नानक देव जी द्वारा दिए गए उपदेशो में बताया गया हैं.. 

87. एक ओंकार सतिनाम, करता पुरखु निरभऊ।
निरबैर, अकाल मूरति, अजूनी, सैभं गुर प्रसादि ।।
 
हुकमी उत्तम नीचु हुकमि लिखित दुखसुख पाई अहि।
इकना हुकमी बक्शीस इकि हुकमी सदा भवाई अहि ॥
 
सालाही सालाही एती सुरति न पाइया।
नदिआ अते वाह पवहि समुंदि न जाणी अहि ॥
 
पवणु गुरु पानी पिता माता धरति महतु।
दिवस रात दुई दाई दाइआ खेले सगलु जगतु ॥
 
नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार।
जो शरधा कर सेव दे, गुर पार उतारन हार॥
आपकी सद्भावना ही मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा है

 

  • 88. साचा साहिबु साचु नाइ भाखिआ भाउ अपारू।
    आखहि मंगहि देहि देहि दाति करे दातारू।
    प्रभु सत्य एवं उसका नाम सत्य है।

  • 89. फेरि कि अगै रखीऐ, जितु दिसै दरबारू।
    मुहौ कि बोलणु बोलीएै, जितु सुणि धरे पिआरू।

  • 90. अंम्रित वेला सचु नाउ वडिआई वीचारू।

  • 91. करमी आवै कपड़ा नदरी मोखु दुआरू।
    नानक एवै जाणीऐ सभु आपे सचिआरू।

  • 92. जगत में झूठी देखी प्रीत।
    अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत॥

  • 93. मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यौ चीत।
    अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज की रीत॥

  • 94. मन मूरख अजहूं नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत। 
    नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत॥

  • 95. थापिआ न जाइ कीता न होइ। आपे आपि निरंजनु सोइ।

  • 96. गावीऐ सुणीऐ मनि रखीऐ भाउ। दुखु परहरि सुखु घरि लै जाइ।

  • 97. गुरा इक देहि बुझाई। सभना जीआ का इकु दाता सो मैं विसरि न जाई।

  • 98. तीरथि नावा जे तिसु भावा। विणु भाणे कि नाइ करी।

  • 99. गुरमुखि नादं गुरमुखि वेदं। गुरमुखि रहिआ समाई।
    गुरू ईसरू गुरू गोरखु बरमा। गुरू पारबती माई।।

  • 100. जे हउ जाणा आखा नाही। कहणा कथनु न जाई।

  • 101. जेती सिरठि उपाई वेखा विणु करमा कि मिलै लई।

  • 102. कागदि कलम न लिखणहारू। मंने काबहि करनि वीचारू।

  • 103. ऐसा नामु निरंजनु होइ। जे को मंनि जाणै मनि कोइ।

  • 104. मंनै सुरति होवै मनि बुधि। मंनै सगल भवण की सुधि।

  • 105. मंनै मुहि चोटा ना खाइ। मंनै जम कै साथि न जाइ।

  • 106. मंनै मारगि ठाक न पाइ। मंनै पति सिउ परगटु जाइ।

  • 107. मंनै मगु न चलै पंथु। मंनै धरम सेती सनबंधु।

  • 108. ऐसा नामु निरंजनु होइ। जे को मंनि जाणै मनि कोइ।

  • 109. मंनै पावहि मोखु दुआरू। मंनै परवारै साधारू।

  • 110. ऐसा नाम निरंजनु होइ। जे को मंनि जाणै मनि कोइ।

  • 111. मंनै तरै तारे गुरू सिख। मंनै नानक भवहि न भिख।

  • 112. साचा साहिबु साचु नाइ। भाखिआ भाउ अपारू।
    आखहि मंगहि देहि देहि। दाति करे दातारू।

  • 113. फेरि कि अगै रखीऐ। जितु दिसै दरबारू।
    मुहौ कि बोलणु बोलीएै। जितु सुणि धरे पिआरू।

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Guru Nanak Dev Quotes in English 

अब इस भाग में आगे पढ़ेंगे  Guru Nanak Dev  जी दौरा दिए गए उपदेशो को इंग्लिश भाषा में किये गए अनुवाद में क्युकि हमारे  FB Status Quotes ब्लॉग का सबसे बड़ा उदेश्य यही हैं की सत्य और ज्ञान शांति का सन्देश देने वाले वोचारो और उपदेशों को जन-जन तक पहुंचना चाहे वो किसी भी देश का हो किसी भी धर्म या समाज का हो या कोई भी भाषा जानता हो. तो देर कैसी आईये अब ज्ञान के सागर में फिर से गोते लगाते हैं और पढ़ते हैं आगे..

114. He who regards all men as equals is religious.

115. In this world when you ask of happiness Pain steps forward.

116. The world is a drama, staged in a dream.

117. From His brilliancy everything is illuminated.

118. Those who have loved are those that have found God.

119. No one has been able to find the limits and boundaries of God.

120. Realization of Truth is higher than all else. Higher still is truthful living.

121. Your Mercy is my social status.

122. He who has no faith in himself can never have faith in God.

123. I am neither a child, a young man, nor an ancient, nor am I of any caste.

124. Let no man in the world live in delusion. Without a Guru none can cross over to the other shore.

  Final Word  

दोस्तों आशा करता हूँ की आप सभी को Guru Nanak Quotes – Best 125+ inspirational {Guru Nanak Dev Ji Quotes} पसंद आया होगा और आपने इस पोस्ट में पढ़े सभी विचारो को अपने अंदर ग्रहण किया होगा। दोस्तों अगर यह पोस्ट को लिखते हुए कोई भी हमसे भूल हुयी हो तो छमा अपने इस भाई को छमा कीजियेगा और हमें हमारी गलतियों से जरूर अवगत कराईयेगा ताकि हम अपनी गलती को सुधार सके 

दोस्तों अगर आपको  सिखधर्म से जुड़ा और नानक देव जी के विचारों से आपके के ह्रदय में अगर प्रेम आपसी सदभाव तथा ईश्वर के बताये हुए रास्ते की ज्योति जली हो तो इसे जरूर से अपने दोस्तों को भी शेयर कीजियेगा ताकि उन्हें भी आप के जरिये गुरु नानक जी के विचारो का लाभ मिल सके और वो भी अपने जीवन को सत्य और ईश्वर के बताये मार्ग पर चल सके. धन्यवाद दोस्तों आप सभी ने हमारे इस छोटे से ब्लॉग को अपना सम्पूर्ण प्यार दिया आप सदैव हम आभारी रहेंगे “सत श्री अकाल

 

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